ग्वालियर के मोहनपुर से 3 वर्षीय रितेश पाल एक महीने से लापता है। अनगिनत पुलिसकर्मियों, ड्रोन सर्च और तांत्रिकों के दावों के बाद भी सुराग नहीं मिला। जानिए कैसे अब गिरगांव महादेव पर टिकी है बच्चे को खोजने की आस।
ग्वालियर (द चंबल पोस्ट): “जब इंसान के बनाए कानून और तकनीक हार मान जाते हैं, तो नजरें उस ‘महादेव’ की ओर उठती हैं जो कण-कण में बसते हैं।” ग्वालियर के मोहनपुर में 3 साल के मासूम रितेश पाल की गुमशुदगी का मामला अब कुछ ऐसे ही मोड़ पर आ खड़ा हुआ है। पुलिस ने जमीन-आसमान एक कर दिया, पहाड़ खोद डाले, लेकिन एक महीने बाद भी बच्चे का कोई सुराग नहीं लगा। अब सवाल पुलिस की जांच से उठकर आस्था और दैवीय न्याय की ओर मुड़ गया है।
30 दिन, अनगिनत जवान और खाली हाथ
मुरार थाना क्षेत्र के मोहनपुर स्थित काली माता मंदिर के पास रहने वाला 3 वर्षीय रितेश पाल 1 नवंबर की दोपहर घर के बाहर खेलते हुए अचानक गायब हो गया था। प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया। आईजी (IG), डीआईजी (DIG) और एसएसपी (SSP) समेत पुलिस के करीब 250 जवानों ने दिन-रात एक कर दिया।
- तकनीक का इस्तेमाल: पुलिस ने जंगलों में ड्रोन से सर्चिंग कराई।
- जमीनी कार्रवाई: जेसीबी (JCB) से झाड़ियां हटवाई गईं, पानी के गड्ढे खाली कराए गए, यहाँ तक कि गोबर के ढेर भी खंगाले गए।
- इनाम: बच्चे का सुराग देने वाले को 30 हजार रुपये के इनाम की घोषणा भी की गई।
बावजूद इसके, पुलिस के हाथ अब भी खाली हैं। न तो मुखबिर तंत्र काम आया और न ही आधुनिक संसाधन।
तांत्रिकों के चक्कर में भटका परिवार
हताश परिवार ने अंधविश्वास का सहारा भी लिया। बच्चे के मामा के कहने पर एक ‘भगत’ (तांत्रिक) का सहारा लिया गया। भगत ने दावा किया था कि बच्चा 24 घंटे में वापस आ जाएगा, फिर दोबारा समय मांगा, लेकिन अब उस भगत ने भी आना बंद कर दिया है। अंधविश्वास की गलियों में भी परिवार को सिर्फ निराशा ही हाथ लगी।
पुलिस को अपनों पर ही शक
पुलिस की जांच अब घर के अंदर की ओर मुड़ गई है। अफसरों का मानना है कि बच्चे के लापता होने की जानकारी परिजनों को हो सकती है, लेकिन मामला पारिवारिक होने के कारण पुलिस ज्यादा सख्ती नहीं बरत पा रही है। पुलिस को शक है कि खेल घर के अंदर का ही है।
अब ‘गिरगांव महादेव’ ही दिखाएंगे राह?
जब प्रशासन की दौड़-भाग और तांत्रिकों के दावे झूठे साबित हो गए, तो आखिर में सच की तलाश लोगों को गिरगांव महादेव (Girgaon Mahadev) के दर पर ले आई।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, गिरगांव महादेव न्याय के देवता माने जाते हैं। पुलिस की सख्ती से जो सच बाहर नहीं आ सका, उसे महादेव के डर से बाहर लाने की कोशिश की गई। कुछ दिन पहले माता और पिता, दोनों पक्ष के लोग गिरगांव महादेव मंदिर पर एकत्रित हुए। मकसद था- मंदिर में कसम खाकर यह साबित करना कि उन्हें बच्चे के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
हालांकि, मंदिर पहुंचने के बाद दोनों ही पक्ष बिना कसम खाए वापस लौट आए, जिसने इस रहस्य को और गहरा कर दिया है। लेकिन अब क्षेत्र के लोगों और लाचार मां-बाप की नजरें गिरगांव महादेव पर ही टिकी हैं। लोगों का मानना है कि जहाँ 250 पुलिसकर्मी नाकाम रहे, वहां अब महादेव का न्याय ही रितेश का पता बताएगा।
