वालियर। कभी अपराधियों में खौफ़ पैदा करने वाली ग्वालियर क्राइम ब्रांच की सक्रियता इन दिनों कम होती दिख रही है। लगातार हथियार और मादक पदार्थ तस्करी के मामलों में ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है, जिससे सिस्टम की कार्यक्षमता पर सवाल उठने लगे हैं।क्राइम ब्रांच की पहचान हमेशा त्वरित कार्रवाई और बिना दबाव के फैसलों से रही है, लेकिन अब इन पहलुओं में स्पष्ट सुस्ती दिखाई देती है। विशेषज्ञों के अनुसार, अपराध नियंत्रण का तंत्र सिर्फ नेतृत्व पर नहीं, बल्कि व्यवस्था की मजबूत साझेदारी, संसाधनों की उपलब्धता और टीम के हर सदस्य की सक्रियता पर निर्भर करता है।इन दिनों टीमों की सीमित उपलब्धता, जमीनी स्रोतों की कमी और जांच प्रक्रिया की धीमी रफ्तार इस गिरावट के मुख्य कारण हैं। कई मौकों पर देखा गया है कि क्राइम ब्रांच का ध्यान अब उन प्राथमिक मुद्दों से हटता जा रहा है, जो पहले उसकी प्रमुखता थे—जैसे अपराधी नेटवर्क की पहचान, तस्करी के संगठित गिरोहों पर ऑपरेशन चलाना, और स्थानीय सूचना तंत्र का इस्तेमाल।यह बदलाव सिस्टम और पूरी व्यवस्था की दक्षता पर सवाल खड़े करता है। अगर मैदान में टीमों को कार्य करने की पूरी स्वतंत्रता, तकनीकी संसाधन और प्रशासनिक सहयोग न मिले, तो अपराध नियंत्रण खुद कमजोर पड़ जाता है।मौजूदा हालात में ग्वालियर को फिर से एक ऐसा सिस्टम चाहिए जो पुराने अभियान जैसी गति, टीमवर्क और निरंतर कार्रवाई लेकर आए। अपराधियों में डर पैदा करने के लिए सिर्फ नाम नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की मजबूती और सक्रियता जरूरी है।
