उत्तर भारत का प्रसिद्ध ग्वालियर व्यापार मेला (Gwalior Trade Fair) अपनी रौनक से ज्यादा अब पार्किंग की ‘अंधेरगर्दी’ के लिए चर्चा में है। मेले में पार्किंग ठेकेदार द्वारा जनता से सरेआम लूट की जा रही है, और हैरानी की बात यह है कि इस लूट को अंजाम देने वाली पर्ची पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और स्वर्गीय माधवराव सिंधिया की तस्वीरें छपी हैं।
बिना रेट की पर्ची, 50 रुपये की वसूली
मेला घूमने आ रहे सैलानियों को पार्किंग के नाम पर जो रसीद (Slip) थमाई जा रही है, वह मेला प्राधिकरण (Mela Authority) द्वारा जारी की गई है। इस पर्ची पर नेताओं की बड़ी-बड़ी तस्वीरें तो हैं, लेकिन पार्किंग शुल्क (Rate) का कॉलम पूरी तरह गायब है या खाली है। नियम कायदों को ताक पर रखकर ठेकेदार के कर्मचारी हर गाड़ी वाले से 50 रुपये वसूल रहे हैं। जब कोई रेट पूछता है, तो उसे हड़का कर या तो 50 रुपए देने के लिए कहा जाता है उसकी गाड़ी को बाहर निकाल दिया जाता है।
यह मामला सिर्फ ज्यादा पैसे वसूलने का नहीं, बल्कि सिस्टम की आंखों में धूल झोंकने का है।
पारदर्शिता जीरो: सरकारी या प्राधिकरण की पर्ची पर रेट न होना अपने आप में एक बड़ा घोटाला है।
जिम्मेदार कौन?: क्या मेला सचिव और प्रशासन को यह नहीं पता कि उनके नाम और नेताओं की फोटो वाली पर्ची पर अवैध वसूली हो रही है?
जनता में आक्रोश
मेले में आए कई लोगों ने शिकायत की है कि 10-20 रुपये की पार्किंग के लिए उनसे 50 रुपये लिए गए। रेट लिस्ट न होने के कारण बहस करने की गुंजाइश भी खत्म कर दी गई है। जनता का कहना है कि प्रशासन ने ठेकेदारों को लूट का खुला लाइसेंस दे दिया है।
