ग्वालियर (Gwalior News): शहर की बिगड़ती फिजा और बेलगाम होते अपराधियों पर अब सरकार का सब्र जवाब दे गया है। सर्किट हाउस में एक हाई-प्रोफाइल बैठक के दौरान नजारा तब बदल गया जब प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने पुलिस और प्रशासन के आला अफसरों से सीधा सवाल दाग दिया— “प्रदेशाध्यक्ष मुझसे पूछ रहे थे कि आपके ग्वालियर में हो क्या रहा है? आपने अब तक एक भी टीआई (TI) को हटाया क्यों नहीं?”
मंत्री के इस एक सवाल ने बैठक में सन्नाटा खींच दिया। कानून व्यवस्था और ट्रैफिक के मुद्दे पर बुलाई गई इस बैठक में अफसरों की कार्यशैली पर जमकर सवाल उठे।
वर्दी का खौफ कहां गायब है? : पुलिस पर सख्त टिप्पणी
सर्किट हाउस में हुई बैठक महज समीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह पुलिस अधिकारियों के लिए एक कड़ी फटकार साबित हुई। मासूम रितेश अपहरण कांड और शहर में बदमाशों द्वारा सरेआम वीडियो बनाकर दहशत फैलाने की घटनाओं पर मंत्री ने तीखी नाराजगी जताई।
उन्होंने पुलिस अधिकारियों की ओर मुखातिब होते हुए दो टूक शब्दों में कहा:
“अपराधियों में पुलिस का खौफ खत्म क्यों हो गया है? आखिर आप लोगों को सख्त कार्रवाई करने से किसने रोका है? जब अपराधी सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर चुनौती दे रहे हैं, तो पुलिस के हाथ क्यों बंधे हैं?”
यह स्पष्ट संदेश था कि अब ‘वर्दी का इकबाल’ सिर्फ बातों में नहीं, बल्कि जमीनी कार्रवाई में दिखना चाहिए।
AC कमरों से बाहर निकलिए जनाब”
शहर की बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था पर भी मंत्री का गुस्सा फूटा। उन्होंने अधिकारियों को फील्ड पर उतरने की नसीहत देते हुए कहा कि ट्रैफिक का हाल ठीक नहीं है। जब वे खुद निकलते हैं तो जाम लग जाता है, तो आम जनता का क्या हाल होता होगा?
उन्होंने तंज कसते हुए और निर्देश देते हुए कहा, “मैदान में निरीक्षण क्यों नहीं करते? खुद देखना चाहिए।” अब अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि वे केवल ऑफिस में बैठकर योजना न बनाएं, बल्कि सड़कों पर उतरकर देखें कि जनता किस मुसीबत का सामना कर रही है।
अब जबाबदेही होगी तय: जिस थाने में अपराध, वहां का अफसर जिम्मेदार
बैठक में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए प्रभारी मंत्री ने साफ कर दिया कि अब बहानेबाजी नहीं चलेगी।
जिम्मेदारी: जिन थाना क्षेत्रों में अपराध होंगे, वहां के पुलिस अफसर सीधे तौर पर जिम्मेदार माने जाएंगे।
कार्रवाई: आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के विरुद्ध जिला बदर और रासुका (NSA) जैसी सख्त कार्रवाई में देरी न हो।
निर्देश: वरिष्ठ अधिकारी नियमित रूप से थानों और अपने क्षेत्रों का भ्रमण करें।
शहर में टू-स्टार’ के भरोसे कानून, ‘थ्री-स्टार’ लाइन हाजिर?
ग्वालियर पुलिस की इस फजीहत के बीच महकमे के गलियारों में एक दबी हुई चर्चा यह भी है, जो इस पूरी व्यवस्था की पोल खोलती है। शहर की कानून व्यवस्था वेंटिलेटर पर है, लेकिन हैरानी की बात है कि ग्वालियर पुलिस लाइन में अनुभवी ‘थ्री-स्टार’ (इंस्पेक्टर/TI) अधिकारियों की फौज बैठी है, फिर भी कई थानों की कमान ‘टू-स्टार’ (सब-इंस्पेक्टर) अधिकारियों के हाथों में क्यों है?
जब शहर को सख्त और अनुभवी कप्तानी की जरूरत है, तब सीनियर अफसरों को साइडलाइन कर जूनियर अफसरों से थाने चलवाना, पुलिस के ‘बैक एंड’ मैनेजमेंट पर बड़े सवाल खड़े करता है। क्या यही वह कारण है जिससे अपराधियों में पुलिस का खौफ खत्म हो गया है?
