ग्वालियर (The Chambal Post): ग्वालियर के मोहनपुर से रहस्यमयी ढंग से लापता हुए 3 साल के मासूम रितेश पाल (Ritesh Pal) के मामले में एक चौंकाने वाला मोड़ आया है। पुलिस की तमाम कोशिशों के बाद भी जब बच्चे का सुराग नहीं मिला, तो मामला अब ‘मजिस्ट्रेट महादेव’ (Magistrate Mahadev) की अदालत में पहुंच गया है। यहाँ न केवल परिजनों ने कसम खाई है, बल्कि मंदिर की पंचायत ने न्याय के लिए एक अजीबोगरीब और सख्त फरमान भी सुनाया है।
पंचायत का अल्टीमेटम: 6 दिसंबर तक का समय
गिरगांव स्थित प्रसिद्ध महादेव मंदिर में जुटी पंचायत ने रितेश के माता-पिता और परिजनों को अपनी सच्चाई साबित करने के लिए 5 दिन का समय दिया है। पंचायत ने साफ तौर पर कहा है कि 6 दिसंबर (शुक्रवार) तक का वक्त ‘न्याय की मियाद’ रहेगी। इस दौरान ‘मजिस्ट्रेट महादेव’ खुद तय करेंगे कि परिजन सच बोल रहे हैं या झूठ!
खौफनाक शर्त: झूठ बोला तो होगी जनहानि या 50 हजार का नुकसान
पंचायत ने मंदिर प्रांगण में एक बेहद सख्त और डरावनी शर्त रखी है। पंचायत का मानना है कि अगर रितेश के परिजनों ने मंदिर में झूठ बोला है या बच्चे के गायब होने में उनका कोई हाथ है, तो भगवान उन्हें इन 5 दिनों के भीतर दंड देंगे।
दंड का स्वरूप: पंचायत के अनुसार, अगर परिजन झूठे हैं, तो उन्हें 50,000 रुपये या उससे अधिक की आर्थिक हानि उठानी पड़ेगी।
जान का खतरा: बात सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं है। पंचायत ने चेतावनी दी है कि झूठ बोलने वाले पर जनहानि (मौत) का संकट भी आ सकता है।
नुकसान हुआ तो माना जाएगा झूठ
पंचायत ने फैसला सुनाया है कि 6 दिसंबर तक अगर परिवार के साथ कोई अनहोनी होती है, कोई मरता है, या 50 हजार रुपये से ज्यादा का कोई भी नुकसान होता है, तो इसे ‘दैवीय संकेत’ माना जाएगा। इसका सीधा मतलब यह निकाला जाएगा कि उन्होंने भगवान की कसम झूठी खाई थी और बच्चे की गुमशुदगी का राज उन्हीं के पास है।
पुलिस की जांच बनाम आस्था की परीक्षा
पूरे क्षेत्र की निगाहें अब 6 दिसंबर की तारीख पर टिकी हैं। क्या इन 5 दिनों में कोई अनहोनी होगी या रितेश का कोई सुराग मिलेगा? यह मामला अब तर्क से परे आस्था पर टिका हुआ है।
