शहर के एक नामी-गिरामी थाने में इन दिनों कानून व्यवस्था का ऐसा ‘अनोखा’ नजारा देखने को मिला है, जिसे सुनकर आप भी अपना माथा पीट लेंगे। पुलिस महकमे के गलियारों से एक बेहद ही चौंकाने वाली ‘उड़ती खबर’ सामने आई है, जिसने खाकी की मुस्तैदी और खुफिया तंत्र पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिकार बनकर आया, शिकार करके चला गया!
उड़ती-उड़ती खबर है कि एक जाने-माने शातिर बदमाश पर कुछ विरोधियों ने हमला कर दिया। हमला होने के बाद वह बदमाश खुद को पीड़ित बताते हुए सीधे थाने पहुंच गया। थाने की कमान संभाल रहीं ‘मैडम टीआई’ और उनके स्टाफ को यह भनक तक नहीं लगी कि उनके सामने जो शख्स मदद की गुहार लगा रहा है, वह पुलिस की ही फाइलों में दर्ज एक बड़ा अपराधी है।
थाने में हुआ मेडिकल, फिर हुआ ‘नौ दो ग्यारह’
मैडम की सरपरस्ती में पुलिस ने पूरी हमदर्दी दिखाते हुए बकायदा उस बदमाश का मेडिकल टेस्ट कराया। लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया जब उस शातिर दिमाग को भनक लग गई कि पुलिस रिकॉर्ड में उसके नाम का स्थायी वारंट पेंडिंग है।
बड़ी चूक: यह बदमाश अवैध हथियारों की तस्करी और सप्लाई के एक गंभीर मामले में लंबे समय से वांटेड चल रहा था। जैसे ही उसे अहसास हुआ कि उसकी पोल खुलने वाली है, उसने मैडम टीआई की ‘लापरवाही’ का फायदा उठाया और थाने से चुपचाप रफूचक्कर हो गया।
पुलिस का सिस्टम कितना अपडेटेड लगातार खड़े हो रहे है सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने थाने की मुखिया यानी मैडम टीआई की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। चर्चाएं गर्म हैं कि:
अपराधियों का डेटा गायब: मैडम को यह तक नहीं पता कि उनके अपने अधिकार क्षेत्र में कौन से बड़े अपराधी वांटेड हैं और किनके वारंट जारी हो चुके हैं।
लापरवाही की हद: जिस इनामी या वांटेड बदमाश को पकड़ने के लिए पुलिस को टीमें बनानी चाहिए थीं, वह खुद चलकर थाने आता है, सरकारी मदद लेता है और आराम से निकल जाता है।
