ग्वालियर पुलिस का एक ऐसा अमानवीय और शर्मनाक चेहरा सामने आया है, जिसने पूरे पुलिस महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है। खुद को ‘ईमानदार और सजग’ बताने वाली ग्वालियर पुलिस ने अपनी गलती छुपाने के लिए सारी हदें पार कर दीं। एक दुष्कर्म पीड़िता जो न्याय के लिए थाने से लेकर एसपी दफ्तर के चक्कर काटते-काटते थक गई और आखिरकार मौत को गले लगा लिया, पुलिस ने उसकी मौत के 5 घंटे बाद उसे थाने में जीवित (फरियादी) दिखाकर FIR दर्ज कर ली।
इस मामले में हड़कंप मचने के बाद आरोपी योगेश रावत को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि पड़ाव थाना प्रभारी (TI) शैलेंद्र भार्गव को फोर्स लीव पर भेज दिया गया है। मामले की जांच एडिशनल एसपी अनु बेनीवाल को सौंपी गई है।
पीड़िता ने क्या-क्या झेला? दर्दनाक दास्तां
मृतका ग्वालियर में रहकर पीएचडी (PhD) की तैयारी कर रही थी। आरोपी योगेश रावत ने उसके साथ जो दरिंदगी और धोखाधड़ी की, उसने छात्रा को भीतर से तोड़ दिया था:
नशीला पदार्थ खिलाकर दुष्कर्म: 13 मार्च को आरोपी योगेश रावत उसे होटल राम्या पैलेस के कमरा नंबर 107 में ले गया। वहां उसने छात्रा को बेहोश कर दुष्कर्म किया। जब छात्रा को होश आया और वह रोने लगी, तो आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसे शांत करा दिया।
बार-बार शोषण और धोखा: 15 मार्च को आरोपी ने फिर उसी होटल में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। जब शादी की बात आई, तो आरोपी मुकर गया और गुड़गांव भागने का नाटक कर दूरी बना ली।
एक्टोपिक प्रेग्नेंसी और सर्जरी का दर्द: इस शोषण के कारण छात्रा गर्भवती हो गई। जांच में पता चला कि उसे ‘एक्टोपिक प्रेग्नेंसी’ (गर्भाशय के बजाय फैलोपियन ट्यूब में भ्रूण का विकसित होना, जो जानलेवा होता है) थी। असहनीय दर्द के कारण 18 अप्रैल को उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा, जहां सर्जरी कर उसका यूट्रस (गर्भाशय) तक निकालना पड़ा।
धमकियां और डिप्रेशन: जब आरोपी योगेश को पता चला कि छात्रा पुलिस में शिकायत करने वाली है, तो उसने खुद जहरीला पदार्थ खाकर अस्पताल में भर्ती होने का नाटक किया। आरोपी की बहनों ने पीड़िता को आरोपी के फोटो भेजकर डराया और धमकाया, जिससे छात्रा गहरे डिप्रेशन में चली गई।
थाने के चक्कर काटती रही, पुलिस ने नहीं सुनी
शारीरिक और मानसिक रूप से टूट चुकी छात्रा न्याय के लिए भटकती रही। वह 6 मई को सबसे पहले पड़ाव थाने पहुंची। इसके बाद 14 मई तक वह पड़ाव थाना और एसपी कार्यालय के चक्कर काटती रही, लेकिन संवेदनहीन पुलिस ने उसकी एक न सुनी। पुलिस एफआईआर दर्ज करने के बजाय मामले को टालती रही।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल: परिजनों का कहना है कि, “अगर पुलिस समय पर एफआईआर दर्ज कर लेती, तो उसकी जान बच जाती। वह बार-बार कहती थी कि आरोपी ने उसका जीवन बर्बाद कर दिया। पुलिस का सिस्टम उसे चक्कर कटवा रहा है।” आखिरकार हताश होकर शुक्रवार शाम करीब 6 बजे छात्रा ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
पुलिस का ‘शर्मनाक खेल’: मौत के बाद जिंदा बताया!
जब पुलिस को पता चला कि छात्रा ने आत्महत्या कर ली है, तो अपनी गर्दन बचाने के लिए पड़ाव पुलिस ने आनन-फानन में रात 11:55 बजे एफआईआर (FIR No. 0122) दर्ज की।
कानून का मज़ाक कैसे उड़ाया गया, इन बिंदुओं से समझिए:
छात्रा की मौत शाम 6:00 बजे हो चुकी थी।
पुलिस ने एफआईआर रात 11:55 बजे दर्ज की (मौत के करीब 5 घंटे बाद)।
एफआईआर में पुलिस ने ‘रिपोर्ट देरी से दर्ज कराने का कारण’ वाले कॉलम में लिखा: “फरियादिया के थाना उपस्थित आने पर”।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जो लड़की 5 घंटे पहले दुनिया छोड़ चुकी थी, वह चलकर थाने कैसे आई? पुलिस ने अपनी लापरवाही छुपाने के लिए एक मृतका की थाने में मौजूदगी कैसे दिखा दी?
जांच के आदेश, टीआई फोर्स लीव पर
यह एफआईआर अब ग्वालियर पुलिस के गले की फांस बन गई है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) अनु बेनीवाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा है कि, “दुष्कर्म के केस में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले में एफआईआर में लापरवाही क्यों बरती गई और विलंब क्यों हुआ, इसकी विस्तृत जांच की जा रही है। थाना प्रभारी को फोर्स लीव पर भेज दिया गया है।”
