ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल अंचल में आज भी लोगों की आस्था कानून व्यवस्था के समानांतर चलती दिखाई देती है। ताजा मामला मुरार इलाके का है, जहाँ पुलिस की नाकामी के बाद एक लापता बच्चे के परिजनों ने न्याय के लिए भगवान की अदालत का दरवाजा खटखटाया।
शनिवार शाम को ‘मजिस्ट्रेट महादेव’ (Magistrate Mahadev) की अदालत द्वारा दिया गया ‘दैवीय अल्टीमेटम’ पूरा हो गया। इसके बाद लापता बच्चे के ददिहाल और ननिहाल, दोनों पक्षों ने राहत की सांस ली और पुलिस से गुहार लगाई कि अब प्रशासन अपना काम करे।
क्या है रितेश पाल के गायब होने की मिस्ट्री?
मुरार के मोहनपुर निवासी 3 वर्षीय मासूम रितेश पाल रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गया था। स्थानीय पुलिस ने काफी हाथ-पैर मारे, लेकिन बच्चे का कोई सुराग नहीं लगा। जब पुलिस खाली हाथ रही, तो परिवार के सदस्यों के बीच आपसी शक गहराने लगा। इसी शक को दूर करने और “सच्चे न्याय” के लिए 2 दिसंबर को दोनों पक्ष (बच्चे के दादा और ननिहाल पक्ष) गिरगांव स्थित प्राचीन ‘मजिस्ट्रेट महादेव’ के मंदिर पहुंचे।
शिवलिंग के सामने अग्निपरीक्षा
मंदिर में गांव के पंचों की मौजूदगी में एक अनोखी ‘अदालत’ लगी। यहाँ दोनों पक्षों ने शिवलिंग के सामने कसम खाई। शर्त यह थी कि अगर किसी ने भी बच्चे को गायब किया है या वे इसमें शामिल हैं, तो शनिवार शाम 6 बजे तक उन्हें “दैवीय दंड” मिलेगा या उनका कोई नुकसान होगा।
अल्टीमेटम पूरा, दोनों पक्ष बोले- हम निर्दोष हैं
शनिवार शाम 6 बजे की समय सीमा समाप्त हो गई। खबर के मुताबिक, दोनों पक्षों में से किसी के साथ कोई अनहोनी नहीं हुई। इसे आधार बनाकर अब दोनों परिवार खुद को निर्दोष बता रहे हैं।
बच्चे के मामा राजू पाल ने मीडिया को बताया:
“हमारा कोई नुकसान नहीं हुआ। अगर हमने ऐसा किया होता तो जरूर कोई नुकसान होता। हमें महादेव पर पूरा भरोसा है। अब हम पुलिस से कहेंगे कि बच्चा ढूंढें। हम शुरू से कह रहे हैं, इसमें हम शामिल नहीं हैं।”
वहीं, बच्चे के पिता दलवीर पाल ने भी अपनी बेगुनाही का दावा करते हुए कहा:
“परिवार में सब ठीक है। बच्चे को गायब करने में हम शामिल नहीं हैं। अगर ऐसा होता तो एक बच्चा मेरे ही पास है। ससुराल से बच्चा क्यों गायब करता? मैं फिर से महादेव की अदालत में जाऊंगा। वही रास्ता दिखाएंगे, बच्चे से मिलाएंगे।”
अब पुलिस पर बढ़ा दबाव
आस्था की इस अदालत से ‘बरी’ होने के बाद परिजनों ने गेंद वापस पुलिस के पाले में डाल दी है। उनका कहना है कि जब भगवान ने भी इशारा कर दिया है कि परिवार निर्दोष है, तो अब पुलिस को अपनी जांच तेज करनी चाहिए और पता लगाना चाहिए कि आखिर 3 साल का रितेश कहां है।
यह मामला एक तरफ जहाँ परिवार की बेबसी को दिखाता है, वहीं दूसरी तरफ यह सवाल भी खड़ा करता है कि क्या 21वीं सदी में पुलिस जांच का विकल्प ‘दैवीय न्याय’ हो सकता है? फिलहाल, रितेश का पता अब भी नहीं चल सका है।
