ग्वालियर | द चंबल पोस्ट
ग्वालियर शहर के प्रवेश द्वारों पर किस तरह कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, इसका जीता-जागता सबूत नैनागिर तिराहे पर देखने को मिल रहा है। नगर निगम के नाम पर यहाँ सरेआम बाहर से आने वाले वाहनों से अवैध वसूली (Illegal Recovery) की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि इस वसूली के लिए कोई टेंडर (Tender) नहीं है, फिर भी डंडे के जोर पर यह ‘लूट’ का कारोबार बदस्तूर जारी है।
सिस्टम’ की नाक के नीचे चल रही अवैध दुकान
सूत्रों की मानें तो नैनागिर तिराहे पर चल रही यह वसूली पूरी तरह से गैर-कानूनी है। बिना किसी सरकारी आदेश और बिना किसी वैध अनुबंध के, कुछ लोग बैरियर लगाकर वाहन चालकों को धमकाते हैं और उनसे निगम कर (Tax) के नाम पर पर्चियां काट रहे हैं। जब कोई वाहन चालक सवाल करता है, तो उसे नियमों का हवाला देकर चुप करा दिया जाता है। यह सब प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है, लेकिन मजाल है कि किसी अधिकारी को यह दिखाई दे।
ऊपर से नीचे तक सबको जा रहा हिस्सा?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना टेंडर के इतनी बड़ी वसूली कैसे संभव है? क्या यह माना जाए कि ग्वालियर नगर निगम और जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद में हैं? या फिर हकीकत यह है कि इस ‘काली कमाई’ का हिस्सा (Commission) ऊपर से नीचे तक बंट रहा है?
जानकारों का कहना है कि यह अवैध वसूली का रैकेट अधिकारियों के संरक्षण के बिना एक दिन भी नहीं चल सकता। सुबह से शाम तक लाखों रुपये की उगाही होती है और यह पैसा शाम होते ही जिम्मेदार कुर्सियों पर बैठे ‘सफेदपोशों’ की जेबों में पहुंच जाता है। इसी ‘बंदरबांट’ के कारण बार-बार शिकायतें करने के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं होती।
शिकायतों को रद्दी की टोकरी में डाल रहे अफसर
स्थानीय लोगों और वाहन चालकों ने कई बार इस अवैध वसूली की शिकायत संबंधित अधिकारियों से की है, लेकिन हर बार शिकायतों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया जाता है। ऐसा लगता है कि अधिकारियों ने अपनी आंखों पर ‘कमीशन’ की पट्टी बांध रखी है। शहर की सीमा पर हो रही इस लूट ने प्रशासन की साख पर सवालिया निशान लगा दिया है।
यह ‘अंधेर नगरी’ वाला हाल है, जहां टेंडर खत्म होने के बाद भी वसूली चालू है। जनता लुट रही है और सिस्टम मौज कर रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस खबर के बाद अपनी नींद तोड़ता है या फिर यह ‘गुंडा टैक्स’ इसी तरह अधिकारियों की सरपरस्ती में चलता रहेगा।
