ग्वालियर (द चम्बल पोस्ट): क्या गौशालाएं अब गायों का संरक्षण केंद्र नहीं, बल्कि उनका अंतिम विश्राम स्थल बन गई हैं? ग्वालियर की प्रसिद्ध लाल टिपारा शासकीय गौशाला से आई एक विचलित करने वाली तस्वीर और एक सरकारी डॉक्टर की लिखित शिकायत ने यह गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है।
11 दिसंबर 2025 को एक आवारा गाय को जीवनदान देने की उम्मीद में गौशाला सौंपने वाले डॉ. आशुतोष आर्य (मेडिकल ऑफिसर) को क्या पता था कि मात्र 5 दिनों के भीतर वह गाय वहां दम तोड़ देगी। यह मामला सिर्फ एक गाय का नहीं, बल्कि गौशाला की चारदीवारी के पीछे चल रही ‘अंधेरगर्दी’ का है।
क्या है पूरा मामला?
सुभाष नगर, हजीरा निवासी और शासकीय चिकित्सक डॉ. आशुतोष आर्य ने पशुपालन विभाग के उप संचालक को एक लिखित शिकायत (दिनांक 19/12/2025) सौंपी है। पत्र के अनुसार:
डॉ. आर्य ने 11 दिसंबर 2025 को एक आवारा गाय को लाल टिपारा गौशाला में भर्ती कराया था।
गाय उस समय पूर्णतः स्वस्थ थी (पैरों के पुराने घाव ठीक हो चुके थे)।
मात्र 5-6 दिनों के भीतर संदिग्ध परिस्थितियों में गाय की मृत्यु हो गई।
जब उन्होंने प्रबंधन से कारण पूछा, तो कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला।
तस्वीर जो विचलित करती है
शिकायत के साथ सामने आई एक तस्वीर (फाइल फोटो) ने प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं। तस्वीर में एक शेड के नीचे कई गायें मृत अवस्था में एक के ऊपर एक पड़ी दिखाई दे रही हैं। यह दृश्य बताता है कि डॉ. आर्य की गाय की मौत कोई इक्का-दुक्का घटना नहीं है, बल्कि वहां बड़े पैमाने पर मूक पशु दम तोड़ रहे हैं।
सवालों के घेरे में ‘सिस्टम’: यह गलत क्यों है?
इस घटनाक्रम पर The Chambal Post का विश्लेषण बताता है कि यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक गंभीर अपराध है। यहाँ जानिए क्यों:
स्वास्थ्य और स्वच्छता पर सवाल
तस्वीर में दिख रहे शवों के ढेर न केवल अमानवीय हैं, बल्कि अन्य स्वस्थ गायों और वहां काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी संक्रमण का खतरा पैदा करते हैं। यह ‘कुप्रबंधन’ का सबसे विभत्स रूप है।
अधिकारियों की चुप्पी
एक राजपत्रित अधिकारी (Medical Officer) को अपनी गाय की मौत की जांच के लिए पत्र लिखना पड़ रहा है, यह दर्शाता है कि आम आदमी की सुनवाई की क्या स्थिति होगी।
शिकायतकर्ता की मांगें
डॉ. आशुतोष आर्य ने प्रशासन से चार प्रमुख मांगें रखी हैं, जो बेहद जायज हैं:
मृत गाय का तत्काल पोस्टमार्टम कराया जाए।
मृत्यु के वास्तविक कारणों की निष्पक्ष जांच हो।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति दी जाए।
लापरवाही पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ विभागीय और वैधानिक कार्रवाई हो।
निष्कर्ष
ग्वालियर का पशुपालन विभाग अब क्या कदम उठाता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। क्या यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा, या फिर लाल टिपारा गौशाला की व्यवस्था सुधरेगी?
The Chambal Post प्रशासन से मांग करता है कि वायरल तस्वीर की सत्यता जांची जाए और मूक पशुओं की हत्या के जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई हो।
