श्योपुर (मध्य प्रदेश): भारत के ‘चीता स्टेट’ मध्य प्रदेश से एक बेहद सुखद और गर्व करने वाली खबर सामने आई है। श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क (KNP) में भारतीय मूल की मादा चीता ‘गामिनी’ ने चार शावकों को जन्म दिया है। यह सफलता इसलिए ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि 2022 में शुरू हुए चीता पुनर्वास कार्यक्रम के बाद यह पहली बार है जब किसी चीता ने प्राकृतिक जंगल के वातावरण में सफल प्रसूति की है।
देश में बढ़ी चीतों की संख्या
करीब 25 माह की मादा चीता गामिनी और उसके चार नन्हे शावकों के आने से अब कूनो नेशनल पार्क और देश में चीतों का कुनबा बढ़ गया है। इस जन्म के साथ ही भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर अब 57 हो गई है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर शावकों की तस्वीरें साझा करते हुए इस सफलता पर खुशी जाहिर की और वन विभाग की टीम को बधाई दी।
गामिनी की सफलता क्यों है खास?
वन विभाग के अधिकारियों और सीसीएफ (मुख्य वन संरक्षक) उत्तम कुमार शर्मा के अनुसार, गामिनी पिछले एक साल से अधिक समय से खुले जंगल में रह रही थी। उसने खुद को कूनो की प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप पूरी तरह ढाल लिया था।
भारतीय मूल की सफलता: यह किसी भारतीय मूल की मादा चीता की पहली सफल प्रसूति मानी जा रही है।
प्राकृतिक प्रजनन: जंगल में शावकों का जन्म इस बात का पुख्ता संकेत है कि कूनो का पर्यावरण अब चीतों के लिए अनुकूल हो चुका है और वे यहाँ सुरक्षित रूप से प्रजनन कर पा रहे हैं।
1952 के बाद फिर लौट रही है रौनक
भारत सरकार ने 1952 में चीतों को देश से विलुप्त घोषित कर दिया था। दशकों के इंतजार के बाद नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों को लाकर भारत में फिर से बसाने की कोशिश शुरू हुई। कूनो नेशनल पार्क इस महत्वाकांक्षी परियोजना का केंद्र बना हुआ है।
वैश्विक आंकड़ों की बात करें तो इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) के अनुसार, दुनिया भर में अब केवल 7100 चीते ही बचे हैं। ऐसे में भारत में चीतों का सफल प्रजनन वैश्विक संरक्षण प्रयासों के लिए भी एक बड़ी उम्मीद की किरण है।
