ग्वालियर/दिल्ली: क्या आपने कभी सोचा है कि ग्वालियर की गलियों में घूमने वाले लड़के फेसबुक के जरिए किसी पाकिस्तानी गैंगस्टर के संपर्क में आ सकते हैं? सुनकर किसी थ्रिलर फिल्म की स्क्रिप्ट जैसा लगता है, लेकिन ये कड़वा सच है। ग्वालियर के दो युवकों ने सरहद पार बैठे एक खतरनाक अपराधी के कहने पर पंजाब में जो खूनी खेल खेला, उसका खुलासा होते ही सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं।
फेसबुक पर ‘राणा भाई’ ने बिछाया जाल
इस सनसनीखेज कहानी की शुरुआत हुई फेसबुक से। ग्वालियर का रहने वाला राजवीर (21) फेसबुक के जरिए ‘राणा भाई’ नाम के एक शख्स के संपर्क में आया। ये ‘राणा भाई’ और कोई नहीं, बल्कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के एजेंट और गैंगस्टर शहजाद भट्टी का खास गुर्गा निकला।
राणा भाई ने राजवीर और उसके दोस्त विवेक बंजारा (19) को आलीशान जिंदगी, मोटी कमाई और विदेश भेजने का लालच दिया। ग्वालियर के इन लड़कों को लगा कि ये उनके सुनहरे भविष्य का रास्ता है, लेकिन उन्हें क्या पता था कि वे देश के खिलाफ रची जा रही एक बड़ी साजिश के मोहरे बन चुके हैं।
1 करोड़ का ‘टेरर टैक्स’ और वो नाकाम फायरिंग

पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी ने पंजाब के जीरकपुर में एक आईटी कंपनी और क्लब संचालक से 1 करोड़ रुपये का टेरर टैक्स (फिरौती) मांगा था। कारोबारी को डराने के लिए भट्टी ने अपने इन नए ‘ग्वालियर वाले मोहरों’ का इस्तेमाल किया।
मिशन: जीरकपुर जाकर कारोबारी के क्लब के बाहर फायरिंग करना।
हथियार: राजवीर को गुजरात के अहमदाबाद से एक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल लाने का टास्क दिया गया।
वारदात: 13 अप्रैल को दोनों जीरकपुर पहुंचे। राजवीर ने गोली चलाने की कोशिश की, लेकिन किस्मत से पिस्तौल जाम (मिस फायर) हो गई।
सबूत के लिए बनाया गया ‘लाइव वीडियो’
ये मामला तब और भी डरावना हो गया जब पता चला कि जब राजवीर गोली चलाने की कोशिश कर रहा था, तब विवेक मोबाइल से उसका वीडियो बना रहा था। यह वीडियो बकायदा शहजाद भट्टी को भेजा गया ताकि उसे यकीन हो जाए कि उसके गुर्गे काम कर रहे हैं। यही वीडियो अब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के हाथ लग चुका है, जो इस पूरे केस का सबसे बड़ा सबूत है।
हथियारों की होम डिलीवरी: हर शहर में नया चेहरा
पूछताछ में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। इन लड़कों को नहीं पता था कि उन्हें हथियार कौन दे रहा है। पाकिस्तानी गैंगस्टर के इशारे पर हर शहर में एक नया अनजान शख्स इन्हें हथियार और कारतूस डिलीवर करने आता था। इनका संपर्क सिर्फ वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम कॉल के जरिए होता था।
ग्वालियर के लिए चेतावनी!


ग्वालियर के इन दो युवाओं की गिरफ्तारी ने पूरे चंबल-ग्वालियर अंचल को हिला कर रख दिया है। यह इस बात का सबूत है कि सोशल मीडिया के जरिए दुश्मन देश के एजेंट कैसे हमारे ही बच्चों को गुमराह कर रहे हैं।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल अब इस नेटवर्क की आखिरी कड़ी को खोजने में जुटी है। क्या ग्वालियर में और भी ऐसे युवक हैं जो ‘राणा भाई’ के इस खतरनाक जाल में फंसे हैं? यह एक बड़ा सवाल है।
